अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानांजन शलाकया ।
चक्छुरुन्मिलितम येन तस्मै श्री गुरवे नम : । । `
" भीड़ का सामना अकेले करने से वही व्यक्ति घबराता है जो खोया हुआ है स्वयम अपने ही विचारों की भीड़ में और जिसने अपने विचारों { एकाग्रता } की भीड़ में से चुनकर किसी एक विशिष्ट विचार को आगे लाने का अभ्यास किया हैका वह पूरी दुनिया के सामने अकेला खडा रह सकता है ।"