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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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किसी भी भाषा में शब्दों को लिपिबद्ध कर साधारण , सरल , गद्ध्यातामक शैली में विचारों -भावों का जो विस्तार किया जाता है , उसे लेख या आलेख कहा जाता है । 
किसी भी विषय का चयन कर ,विषय की गंभीरता , सरलता , रोचकता का ध्यान रखते हुए आलेख को पठनीय बनाया जाता है । 
वर्तमान के ज्वलंत विषयों पर अपने निरपेक्ष विचारों का मंथन कर सारगर्भित अभिव्यक्ति लेख रचना में उद्धृत है ।

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