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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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अपने जैसा दोस्त  
हिरन और कौआ पुराने दोस्त थे , इनके प्यार को देखकर जगल के दूसरे जानवर भी ईर्ष्या करते थे । एक बार एक गीदड़ जगल में आ गया , उसने जब हिरन को देखा तो लार टपकाने लगा , गीदड़ हिरन के पास गया बोला - मैं यहाँ नया आया हूँ , तुम यदि मेरे दोस्त बन जाओ तो अच्छा होगा । चलो ठीक है हिरन ने उसकी दोस्ती स्वीकार कर ली ।

दिन भर साथ रहने के बाद रात को भी गीदड़ उसके साथ जाने लगा , मृग एक बरगद के पेड के पास रहता था । उसी बरगद के ऊपर कौआ भी अपना घोंसला बनाकर रहता था । गीदड़ को देखकर कौआ बोला - अरे !! मित्र , इसे कहाँ से ले आए , यह हमारा दोस्त है , आज से हमारे साथ ही रहेगा । कौआ बोला - हिरन भाई ! किसी भी अजनबी से दोस्ती ठीक नही , धोखा हो सकता है ।

गीदड़ समझ गया और वहां से चुपचाप निकल गया , वह सोचने लगा यदि मैने हिरन को नुकसान पहुँचने का प्रयास किया तो ये काओं का झुंड मुझे जिन्दा नही छोडेगा । दोस्ती हमेशा बराबर वालों से ही करनी चाहिए ।

रेनू ....
 

 

 

 

 

 

 

 

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