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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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अपराध

अपराध एक येसा शब्द है या एक काल्पनिक अवगुण है जो मानव दूसरे व्यक्ति मैं नही देखना चाहता किंतु अपने ह्रदय मैं इस भावना को गुण मानकर पोषित करता है ।
प्रजा तंत्र के इतिहास मैं ही सबसे अधिक अपराध हुए हैं ।
हर बढ़ी संपन्नता के पीछे एक अपराध होता है ।
जिस प्रकार व्यक्ति अपराध करने के लिए स्वतंत्र है , उसे रोकने के लिए भी समर्थ है , तभी समाज मैं विधि परम्परा का उदय हुआ होगा ।

apradh
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