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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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चौपायातंत्र
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चौपायातंत्र

पंचतत्व ही हमारी सृष्टि का मूल है । पृथ्वी पर प्राणिजगत में मानव का अस्तित्व भी पशु , पक्षी , कीट - पतंगों आदि के बिना असंभव है । 

जानवरों का व्यवहार , उनका आकार , रहन -सहन , आदतें आदि का सूक्ष्मता से निरिक्षण करने के बाद ही मानव ने विज्ञानं की ऊँचाइयों को छुआ । 

सदियों से पशु -पक्षियों और जानवरों के साथ इन्सान की मित्रता के रोचक किस्से हम पंचतंत्र की कहानियो के माध्यम से पढ़ते आ रहे हैं । 

चौपयातंत्र हमें जानवरों को मुख्य पात्र बनाकर शिक्षाप्रद लघु कहानियो का उपहार देता है । हमारे जीवन में जानवरों कीमहत्ता को बढाता है ।

chopaya
Recent "Chaupayatantra"
 
नम्रता की जीत
सच्चा बंधन
रंगीन सियार
मगर और बन्दर
बैल और गधा
मजाक की हद
लोमडी और मुर्गा
लालच बुरी बला है
अपने जैसा दोस्त
सन्यासी
पश्चात्ताप
मुसीबत
लोमडी और कठफोडवा
लालच का फल
 
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