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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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चौपायातंत्र
हमारी पुस्तके
 
चौपायातंत्र
  मंगलू की सीख  
 
  शैतान चिडिया  
 
  जंगल की होली  
 
  लालच का फल  
 
  लोमडी और कठफोडवा  
 
  बेचारा शेर  
 
  कमाल की दोस्ती  
 
  नई सरकार  
 
  बैल और गधा  
 
  मगर और बन्दर  
 
  रंगीन सियार  
 
  लोमडी और मुर्गा  
 
  मजाक की हद  
 
  पश्चात्ताप  
 
  सन्यासी  
 
  अपने जैसा दोस्त  
 
  लालच बुरी बला है  
 
  लोमडी और मुर्गा  
 
  मजाक की हद  
 
  बैल और गधा  
 
  मगर और बन्दर  
 
  रंगीन सियार  
 
  सच्चा बंधन  
 
  नम्रता की जीत  
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