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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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लालच बुरी बला है  
जंगल मैं एक बूढा शेर शिकार की तलाश कर रहा था , उसे जब शिकार नही मिला तब उसने झील में नहाने का मन बना लिया , बाहर निकलकर उसने लोगों को आवाज लगाई -ओ , जाने वालो सोने के कंगन दान में ले लो , शेर ने अपने कंगन सामने रख लिए थे , सब लोग सोच रहे थे कि शेर मूर्ख बना रहा है , इसके पास कंगन नही हो सकते , कोई कहता कि शेर लालच दे रहा है , कोई कहता - चलो देखते हैं क्या माजरा है ।

एक आदमी शेर के पास चला गया और बोला -बताओ कहाँ है कंगन ? ये रहे , शेर ने कंगन दिखा दिए । आदमी बोला - तुम्हारा विश्वास कैसे करुँ , तब शेर ने कहा - देखो मेरा पूरा परिवार ख़तम हो गया है , में अकेला हूँ , अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए ही में यह धर्म -कर्म कर रहा हूँ । इसलिए सरोवर में स्नान करो और कंगन ले जाओ , आदमी बूढे शेर की बातों में आ गया , सरोवर में जाते ही वह दलदल में फंस गया । शेर बोला - अरे !! तुम तो फंस गए ? शेर अन्दर गया और आदमी को बाहर खींच लिया , एक झटके में ही आदमी को खा गया ।

इसलिए कहा जाता है कि बिना बिचारे कोई काम नही करना चाहिए ।

रेनू ....
 

 

 

 

 

 

 

 

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