चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
Home
About Us
Contact Us
Releated Link
English Books
कविता
कहानी
गुरुजी उवाच
लेख
आध्यात्म
चौपायातंत्र
हमारी पुस्तके
Maati Ki Gandh
पुरबिनी दादी
शहतूत का पेड
बड़ा आँगन
डर
बेटी
छाप
पटरी के पैसे
मेला
धुप -छाँव
आत्म विश्वास ्या है ?
कुटिया
वापसी
तीसरी जिन्दगी
सावन के झूले
सहेली
पराई बेटी
अम्मा
अस्तित्व
खपरैल
नीम का पेड
Comments
CopyRight 2009 Vichar Manthan
Powered By :
Expert Infotech Bhopal