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चेतना और शुद्ध विचार ही उर्जा रूप में हमारी सृष्टी के वाहक हैं । विचार के सक्रिय होते ही मंथन आरम्भ होता है , मंथन की प्रक्रिया ही चैतन्य शुद्ध भाव प्रस्फुटित कर शब्दार्थ की अभिव्यक्ति करती है । शब्दार्थ का भावपूर्ण लेखन ही कभी कहानी , कविता , लेख , व्यंग और कभी हमारे आध्यात्म को रचता है ।
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परिचय

डॉक्टर रेणु शर्मा

२० जनवरी १९६१ को आगरा में जन्म,

१९८४ में आगरा विश्वविध्यालय से संस्कृत में

स्नातकोत्तर और १९९४ में बरकतुल्लाह विश्वविध्यालय

भोपाल से पीएच .डी.की उपाधि प्राप्त की ।

भारतीय संस्कृत संस्थान नई दिल्ली द्वारा २००४

में पुस्तक "अपराध और अर्थशास्त्र "का प्रकाशन।

"माटी की गंध" लघु कथा संग्रह का २००८ में प्रकाशन ।

"नवलय अनुबोध"पत्रिका में निरंतर कहानियो का प्रकाशन।

"परिक्रमा पथ " कविता संग्रह '' प्रकाशन के लिए तैयार ।

विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कविता , कहानी , लेख, व्यंग
निरंतर प्रकाशित और अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मलेन में कविता पाठ । आकाशवाणी भोपाल से
संस्कृत विषय से सम्बंधित अनेक वार्ताएं प्रसारित। आध्यात्मिक कविताओं का संग्रह "समर्पण" अपने
गुरूजी श्री.शैलेन्द्र शर्मा जी के ५० वे जन्मदिन पर उन्हें समर्पित। पति डॉक्टर विमल कुमार शर्मा द्वारा
" एकांत " कविता संग्रह एवं बेटियों आकृति शर्मा द्वारा अंग्रेजी काव्य संग्रह "पर्ल्स फ्रॉम दा ओयेस्तार्स" और "दा वौइस् ऑफ़ माय सोल "का प्रकाशन , आवृति शर्मा द्वारा ड्राइंग एंड पेंटिंग का संग्रह ।

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